Bihar Elections 2026: योगी आदित्यनाथ ने किया बड़ा ऐलान! बिहार में NDA की वापसी तय, रैली में दिखी भारी भीड़

Bihar Elections 2026: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 11 नवंबर, 2026 को होने वाला है। इस महत्वपूर्ण चुनाव में बीजेपी और एनडीए अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत से प्रचार कर रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिहार में चुनावी रैलियों का आयोजन कर रहे हैं। रविवार, 9 नवंबर 2025 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुपौल में एक विशाल चुनावी सभा को संबोधित किया। इस सभा में उन्होंने एनडीए सरकार की सफलता और बिहार में पार्टी की मजबूत पकड़ पर जोर दिया।
एनडीए सरकार की वापसी की भविष्यवाणी
सुपौल में जनता को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, “इस विशाल भीड़ को देखकर मैं आत्मविश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जब 14 नवंबर को ईवीएम खोली जाएंगी, तो न केवल छठापुर में बल्कि पूरे बिहार में एनडीए सरकार फिर से स्थापित होगी।” उनके इस बयान से यह साफ होता है कि एनडीए बिहार में चुनावी जीत के लिए पूरी रणनीति के साथ काम कर रहा है और जनता के बीच अपनी मौजूदगी को मजबूत कर रहा है।

बिहार की गौरवशाली पहचान और इतिहास
योगी आदित्यनाथ ने बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “बिहार, जिसकी अपनी गौरवशाली इतिहास और संस्कृति है, वह भारत के स्वर्ण युग को देने वाली भूमि है। यहां 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर भी इसी पवित्र भूमि से हैं। शारदा सिन्हा ने मैथिली और भोजपुरी संस्कृति को छठ गीतों के माध्यम से पहचान दिलाई।” उन्होंने बिहार की इस गौरवशाली पहचान को याद दिलाकर जनता को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया।
जंगल राज और युवाओं की पहचान संकट
सीएम योगी ने कांग्रेस और RJD पर बिहार में जंगल राज और राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बिहार ने आर्यभट्ट जैसे खगोलविद और चाणक्य-चंद्रगुप्त मौर्य जैसी महान शख्सियतों को जन्म दिया, लेकिन कुछ कारणों से बिहार आज अस्वस्थ हो गया। इसे जंगल राज बनाने में कांग्रेस और RJD दोषी हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इन वर्षों में जातिगत भेदभाव और वंशवाद ने युवाओं की पहचान संकट पैदा कर दी है। जो भूमि नालंदा विश्वविद्यालय जैसी शिक्षाप्रद संस्था देने वाली थी, वहां साक्षरता का स्तर सबसे कम हो गया। उनका संदेश स्पष्ट था कि बिहार को फिर से विकास और शांति की ओर लाने के लिए एनडीए ही सक्षम विकल्प है।